पेशावर हमले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कोई भी सरकार या देश हो,
चाहे जितनी बड़ी-बड़ी बातें कर लें, लेकिन वे अमेरिका और इस्राईल के दोगले चेहरे को
नहीं पहचान सकते| यह हक़ीक़त है कि पाकिस्तान में जिहादी ग्रुप मौजूद हैं|इसका कोई
भी इंकार नहीं कर सकता| लेकिन सवाल यह है कि क्या दुनिया भर में हो रहे आतंक की
वजह यही लोग हैं? नहीं! सौ फीसद नहीं!| फिर आखिर यह सब कौन कर रहा है|इसको जानने
के लिए अमेरिका के आतंकी चेहरे को पहचानना ज़रूरी है| क्योंकि इन्होंने यह तय कर
लिया है कि वे लोग दुनिय भर के मुसलमानों को आतंकवादी साबित कर के दुनिया से
अलग-थलग कर देंगें और फिर उस पर हमला करके उनके आर्थिक स्थिति को तहस-नहस कर
देंगें| ताकि वह आज़ादी के साथ पूरी दुनिया पर हावी हो सके| क्योंकि इन यहूदियों को
मुसलमानों की ताक़त का अंदाजा है और बीते 1400 सालों में वह इसका मज़ा भी चख चुके
हैं|दोबारा उनके साथ वही इतिहास न दोहराए जाए इसलिए गाहे-बगाहे पेशावर जैसे वारदात
अंजाम देते रहते हैं| ताकी वह हक़ीक़ी इस्लामी मुजाहिदीन(जिनका उद्देश्य अमेरिका के
खिलाफ यलगार और उसकी दरिन्दगी व शैतानी करतूतों से इअलामी देशों और दुनिया को
बचाना है) को दुनिया के सामने बदनाम कर उन्हें सबके लिए खतरा स्थापित कर
सकें|इसलिए बार-बार वे जिहादी लिबादह पहन कर मुसलमानों की छवी को दागदार करते रहते
हैं|यह समझना बहुत ज़रूरी है कि कश्मीर से लेकर फिलस्तीन तक के आतंकवादी एक ही
तंदूर के पके पकाएं हैं, जिसको आंच अमेरिका प्रदान करता है|इसलिए ज़रूरी है की तमाम
मुसलमान मस्ल्की दुश्मनी को भुला कर एक प्लेटफार्म पर इकठ्ठा हो जाएँ ताकि
यहूदियों की जारहियत का मुक़ाबला ढाल बनकर कर सकें|क्योंकि पेशावर जैसी कहानी हमारे
साथ भी दोहराई जा सकती है|